बहुत ‘बेफिक्र’ है ये दिल, मगर एक फ़िक्र रेहती है.
मेरे शब्दों से कोई दिल, कहीं आहत ना हो जाए..
सर्द हवाओं में कहीं बोल जम ना जायें;
लंबा सफ़र हैं कहीं लोग थम ना जायें
और कुछ साल मुझे यूँ ही तड़प लेने दो, ख़ुद ब ख़ुद मेरी तबीयत भी सम्हल जाएगी,
तेज रफ़्तार से बहती हुई दरिया ‘बेफिक्र’, एक ख़ामोश किनारे पे ठहर जाएगी।